वे परमानंद से मदमस्त होकर लगातार आगे-पीछे झूमते रहे, तथा योग-वशिष्ठ नामक ग्रन्थ पर भाष्य करते हुए ज्ञान की महिमा का बखान करते रहे।
Intoxicated with ecstasy, he continued to sway back and forth, and while commenting on the text called Yoga-Vashishtha, he kept extolling the glory of knowledge.
तात्पर्य
अभक्त मायावादी ग्रन्थ योगवासिष्ठ की व्याख्या करते समय, श्री अद्वैत प्रभु ने भक्तिमार्ग के प्रति अपनी घृणा का प्रदर्शन किया। उनका उद्देश्य महाप्रभु को भक्ति का प्रचार करने से रोकना था, ताकि वे [गौरा] उनकी उपासना करने के बजाय उन्हें दंड दे सकें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥