श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  2.19.194 
তেঞি সে বলিলুঙ্ প্রভু তোমারে লঙ্ঘি
যামোর সেবা করে তারে মারি পোডাইযা
तेञि से बलिलुङ् प्रभु तोमारे लङ्घि
यामोर सेवा करे तारे मारि पोडाइया
 
 
अनुवाद
“इसीलिए मैं घोषणा करता हूँ कि जो कोई तेरा अपराध करता है और मेरी सेवा करता है, मैं उसे जलाकर राख कर दूँगा।
 
“Therefore I declare that whoever sins against you and serves me, I will burn him to ashes.
तात्पर्य

जो श्री चैतन्य के सेवकों से ईर्ष्या करने के लिए उत्सुक हो जाता है और अद्वैत के साथ संबंध बनाकर खुद को "सेवक" के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, उसे अद्वैत सुदक्षिणा की तरह भस्म कर देता है। अद्वैत प्रभु और महादेव कभी भी भगवान विष्णु और वैष्णवों से ईर्ष्या करने वाले उपासकों की पूजा स्वीकार नहीं करते हैं। आज भी अभिमानी लोग प्रतिद्वंद्वी सभाओं, प्रतिद्वंद्वी कीर्तनों और प्रतिद्वंद्वी प्रचार का गर्व से आयोजन करके भक्ति सेवा को बदनाम करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भगवान विष्णु और वैष्णव, जो कीर्तन के पात्र हैं, वैष्णवों की सेवा करने की उनकी प्रवृत्ति को लगातार नष्ट करते हैं, उन्हें अपने स्वार्थ में उलझाकर। अपने स्वयं के व्यवहार से, ऐसे लोग वासना और क्रोध के सेवक बनकर स्वयं को नष्ट कर लेते हैं, इसलिए शुद्ध भक्ति सेवा उन्हें हमेशा के लिए छोड़ देती है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)