श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.19.190 
জয মহাচক্র, জয বৈষ্ণব-প্রধান
জয দুষ্ট-ভযঙ্কর, জয শিষ্ট-ত্রাণ”
जय महाचक्र, जय वैष्णव-प्रधान
जय दुष्ट-भयङ्कर, जय शिष्ट-त्राण”
 
 
अनुवाद
"वैष्णवों में श्रेष्ठ सुदर्शन चक्र की जय हो! दुष्टों के संहारक और धर्मात्माओं के रक्षक की जय हो!"
 
"Hail the Sudarshan Chakra, the best among Vaishnavas! Hail the destroyer of the wicked and protector of the righteous!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)