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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 188
श्लोक
2.19.188
হেন মহা-বৈষ্ণব-তেজের স্থানে মুঞি
কোথা পলাইব প্রভু যে করিস্ তুই
हेन महा-वैष्णव-तेजेर स्थाने मुञि
कोथा पलाइब प्रभु ये करिस् तुइ
अनुवाद
“अतः हे प्रभु, मैं आपसे कैसे बच सकता हूँ, क्योंकि आप महान वैष्णवों के पराक्रम से संपन्न हैं?
“So, O Lord, how can I escape from You, since You are endowed with the prowess of the great Vaishnavas?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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