श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  2.19.187 
“যারে পলাইতে নাহি পারিল দুর্বাসা
নারিল রাখিতে অজ-ভব-দিগ্বাসা
“यारे पलाइते नाहि पारिल दुर्वासा
नारिल राखिते अज-भव-दिग्वासा
 
 
अनुवाद
दुर्वासा आपसे बचकर भागने में असमर्थ थे, और ब्रह्मा और शिव उनकी रक्षा करने में असमर्थ थे।
 
Durvasa was unable to escape from you, and Brahma and Shiva were unable to protect him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)