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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 183
श्लोक
2.19.183
তালজঙ্ঘ পরমাণ বলে,—ঽবর মাগঽ
রাজা বলে,—ঽদ্বারকা পোডাও মহাভাগঽ
तालजङ्घ परमाण बले,—ऽवर मागऽ
राजा बले,—ऽद्वारका पोडाओ महाभागऽ
अनुवाद
ताड़ के वृक्षों के समान लम्बे पैरों वाले उस राक्षस ने कहा, `वर मांगो।` राजा ने उत्तर दिया, `हे सौभाग्यशाली, द्वारका को जलाकर राख कर दो।`
The demon with legs as long as palm trees said, "Ask for a boon." The king replied, "O fortunate one, burn Dwaraka to ashes."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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