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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 182
श्लोक
2.19.182
যজ্ঞ হৈতে উঠে এক মহা-ভযঙ্কর
তিন কর, চরণ, ত্রিশির-রূপ ধর
यज्ञ हैते उठे एक महा-भयङ्कर
तिन कर, चरण, त्रिशिर-रूप धर
अनुवाद
“यज्ञ की अग्नि से तीन हाथ, तीन पैर और तीन सिर वाला एक भयानक राक्षस प्रकट हुआ।
“From the sacrificial fire appeared a terrible demon with three arms, three legs and three heads.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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