श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.19.18 
এই মত চিন্তিযা অদ্বৈত মহা-রঙ্গে
বিদায হৈলা প্রভু হরিদাস-সঙ্গে
एइ मत चिन्तिया अद्वैत महा-रङ्गे
विदाय हैला प्रभु हरिदास-सङ्गे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करके अद्वैत प्रभु प्रसन्नतापूर्वक हरिदास के साथ चले गये।
 
Thinking thus, Advaita Prabhu happily went away with Haridas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)