श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  2.19.177 
মুঞি নাহি বলোঙ্ এই বেদের বাখান
সুদক্ষিণ-মরণ তাহার পরমাণ
मुञि नाहि बलोङ् एइ वेदेर वाखान
सुदक्षिण-मरण ताहार परमाण
 
 
अनुवाद
"ये केवल मेरे वचन नहीं हैं, ये वेदों के वचन हैं। सुदक्षिण का वध इसका प्रमाण है।"
 
"These are not just my words, these are the words of the Vedas. The killing of Sudakshina is proof of this."
तात्पर्य
हिन्दी पाठ्य: वेदव्यास द्वारा रचित पुराण मूल वैदिक इतिहास के विस्तार हैं। पुराण संस्कृत में लिखे गए हैं। वे इतिहास के सरल प्रस्तुतीकरण हैं। चूँकि देवताओं की प्राचीन भाषा में लिखे गए वेदों के लिए सम्मान कम हो गया है, और समय के साथ नष्ट हो जाने के कारण वे आसानी से नहीं मिलते हैं, इसलिए पुराणों को वेदों से अलग मानना ​​सिर्फ मूर्खता है। वे इतिहास जो वेदों की व्याख्या करते हैं, वे पुराणों में संकलित किए गए हैं। उन पुराणों (श्रीमद् भागवतम, दसवां कांड, अध्याय 66) में सुदक्षिणा के विनाश की कथा को अद्वैत के बयानों के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)