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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 170
श्लोक
2.19.170
বর শুনিঽ কান্দযে অদ্বৈত মহাশয
চরণে ধরিযা কহে করিযা বিনয
वर शुनिऽ कान्दये अद्वैत महाशय
चरणे धरिया कहे करिया विनय
अनुवाद
आशीर्वाद सुनकर अद्वैत महाशय रोने लगे। उन्होंने भगवान के चरण पकड़ लिए और विनम्रतापूर्वक इस प्रकार बोले।
Hearing the blessing, Advaita Mahasaya began to cry. He held the Lord's feet and humbly spoke as follows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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