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श्लोक 2.19.166  |
কান্দযে অচ্যুতানন্দ—অদ্বৈত-তনয
অদ্বৈত-ভবন হৈল কৃষ্ণ-প্রেম-ময |
कान्दये अच्युतानन्द—अद्वैत-तनय
अद्वैत-भवन हैल कृष्ण-प्रेम-मय |
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| अनुवाद |
| अद्वैत के पुत्र अच्युतानन्द भी रो पड़े। अद्वैत का पूरा घर कृष्ण के प्रेम से भर गया। |
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| Advaita's son, Achyutananda, also wept. Advaita's entire home was filled with love for Krishna. |
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