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श्लोक 2.19.163  |
সম্ভ্রমে উঠিযা কোলে কৈল বিশ্বম্ভর
অদ্বৈতেরে কোলে করিঽ কান্দযে নির্ভর |
सम्भ्रमे उठिया कोले कैल विश्वम्भर
अद्वैतेरे कोले करिऽ कान्दये निर्भर |
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| अनुवाद |
| विश्वम्भर ने आदरपूर्वक अद्वैत को उठाया और उसे गले लगाते हुए खूब रोये। |
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| Vishvambhar respectfully picked up Advaita and cried a lot while hugging him. |
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