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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 162
श्लोक
2.19.162
এত বলিঽ ভক্তি করিঽ শান্তিপুর-নাথ
পডিলা প্রভুর পদ লাইযা মাথাত
एत बलिऽ भक्ति करिऽ शान्तिपुर-नाथ
पडिला प्रभुर पद लाइया माथात
अनुवाद
ऐसा कहकर शान्तिपुर के स्वामी ने भक्तिपूर्वक भगवान के चरणों पर अपना सिर रख दिया।
Saying this, the Swami of Shantipur reverently placed his head at the feet of the Lord.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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