श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  2.19.160 
মোর নাম অদ্বৈত—তোমার শুদ্ধ দাস
জন্মে জন্মে তোমার উচ্ছিষ্টে মোর আশ
मोर नाम अद्वैत—तोमार शुद्ध दास
जन्मे जन्मे तोमार उच्छिष्टे मोर आश
 
 
अनुवाद
"मेरा नाम अद्वैत है, और मैं आपका अनन्य सेवक हूँ। मेरी एकमात्र इच्छा जन्म-जन्मांतर तक आपके अवशेषों का सम्मान करना है।"
 
"My name is Advaita, and I am your exclusive servant. My only desire is to honor your relics for lifetime after lifetime."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)