श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.19.16 
ঽভক্তি বুঝাইতে সে প্রভুর অবতার
হেন ভক্তি না মানিনুঽ—এই মন্ত্র সার
ऽभक्ति बुझाइते से प्रभुर अवतार
हेन भक्ति ना मानिनुऽ—एइ मन्त्र सार
 
 
अनुवाद
“यद्यपि भगवान ने भक्ति सेवा का प्रचार करने के लिए अवतार लिया है, फिर भी मैं ऐसी भक्ति सेवा का कोई सम्मान नहीं करूँगा - यह मेरा संकल्प है।
 
“Although the Lord has incarnated to propagate devotional service, I will not give any respect to such devotional service – this is my resolve.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)