श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  2.19.156 
আনন্দে অদ্বৈত নাচে সকল অঙ্গনে
ভ্রুকুটি করিযা বলে প্রভুর চরণে
आनन्दे अद्वैत नाचे सकल अङ्गने
भ्रुकुटि करिया बले प्रभुर चरणे
 
 
अनुवाद
अद्वैत पूरे प्रांगण में आनंद से नाचने लगा। उसने भौंहें सिकोड़ीं और भगवान से इस प्रकार कहा।
 
Advaita danced joyfully throughout the courtyard. He furrowed his brows and spoke to the Lord as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)