श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  2.19.155 
ইহাতে সে প্রভু ভৃত্যে চিত্তে বল পায
”বলিযা আনন্দে নাচে শান্তিপুর-রায
इहाते से प्रभु भृत्ये चित्ते बल पाय
”बलिया आनन्दे नाचे शान्तिपुर-राय
 
 
अनुवाद
"अब भगवान और उनके सेवक के बीच का सम्बन्ध सुदृढ़ हो गया है।" ऐसा कहकर, शांतिपुर के भगवान आनंद में नाचने लगे।
 
"Now the bond between the Lord and His servant has been strengthened." Having said this, the Lord of Shantipur began to dance in joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)