श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  2.19.149 
মুঞি সে ধরিলুঙ্ গিরি দিযা বাম হাত
মুঞি সে আনিলুঙ্ স্বর্গ হৈতে পারিজাত
मुञि से धरिलुङ् गिरि दिया वाम हात
मुञि से आनिलुङ् स्वर्ग हैते पारिजात
 
 
अनुवाद
“मैंने ही अपने बाएं हाथ से गोवर्धन पर्वत को उठाया था और मैं ही स्वर्ग से पारिजात पुष्प लाया था।
 
“It was I who lifted the Govardhan mountain with my left hand and it was I who brought the Parijat flower from heaven.
तात्पर्य
इन घटनाओं के बारे में विवरण के लिए श्रीमद् भागवत, दशम स्कंध, अध्याय 25 और 59 का उपयोग करना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)