श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.19.135 
অদ্বৈত-গৃহিণী পতি-ব্রতা জগন্-মাতা
সর্ব-তত্ত্ব জানিযা ও করযে ব্যগ্রতা
अद्वैत-गृहिणी पति-व्रता जगन्-माता
सर्व-तत्त्व जानिया ओ करये व्यग्रता
 
 
अनुवाद
यद्यपि वह सब कुछ जानती थी, फिर भी अद्वैत की पतिव्रता पत्नी और ब्रह्माण्ड की माता ने भगवान को रोकने का प्रयास किया।
 
Although she knew everything, the devoted wife of Advaita and the mother of the universe tried to stop the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)