श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.19.130 
বিশ্বম্ভর-তেজঃ যেন কোটি-সূর্যময
দেখিযা সবার চিত্তে উপজিল ভয
विश्वम्भर-तेजः येन कोटि-सूर्यमय
देखिया सबार चित्ते उपजिल भय
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर का तेज करोड़ों सूर्यों के समान था। यह देखकर सभी लोग भयभीत हो गए।
 
Visvambhara's radiance was like that of millions of suns. Seeing this, everyone was terrified.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)