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श्लोक 2.19.127  |
ক্রোধ-মুখ বিশ্বম্ভর নিত্যানন্দ-সঙ্গে
দেখযে, অদ্বৈত দোলে জ্ঞানানন্দ-রঙ্গে |
क्रोध-मुख विश्वम्भर नित्यानन्द-सङ्गे
देखये, अद्वैत दोले ज्ञानानन्द-रङ्गे |
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| अनुवाद |
| नित्यानंद के साथ क्रोधित विश्वम्भर ने अद्वैत को ज्ञान की खुशी में आगे-पीछे डोलते देखा। |
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| Visvambhara, enraged with Nityananda, saw Advaita swaying back and forth in the joy of knowledge. |
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