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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 126
श्लोक
2.19.126
চৈতন্য-ভক্তের কে বুঝিতে পারে লীলা
গঙ্গা-পথে দুই প্রভু আসিযা মিলিলা
चैतन्य-भक्तेर के बुझिते पारे लीला
गङ्गा-पथे दुइ प्रभु आसिया मिलिला
अनुवाद
भगवान चैतन्य के भक्तों की लीलाओं को कौन समझ सकता है? इस प्रकार दोनों भगवान गंगा में तैरते हुए अद्वैत के घर पहुँचे।
Who can understand the pastimes of Lord Caitanya's devotees? Thus, the two Lords, floating on the Ganges, reached the home of Advaita.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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