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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 125
श्लोक
2.19.125
ঽআইসে ঠাকুর ক্রোধেঽ অদ্বৈত জানিযা
জ্ঞান-যোগ বাখানেঽ অধিক মত্ত হৈযা
ऽआइसे ठाकुर क्रोधेऽ अद्वैत जानिया
ज्ञान-योग वाखानेऽ अधिक मत्त हैया
अनुवाद
अद्वैत प्रभु को एहसास हुआ कि भगवान क्रोधित मनोदशा में आ रहे हैं, और उन्होंने अधिक उत्साह से ज्ञान की व्याख्या करना शुरू कर दिया।
Advaita Prabhu realized that the Lord was getting into an angry mood, and he began to explain the knowledge with more enthusiasm.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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