श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.19.123 
দুই প্রভু ভাসিঽ যায গঙ্গার উপরে
অনন্ত মুকুন্দ যেন ক্ষীরোদ-সাগরে
दुइ प्रभु भासिऽ याय गङ्गार उपरे
अनन्त मुकुन्द येन क्षीरोद-सागरे
 
 
अनुवाद
दोनों भगवान गंगा की लहरों में उसी प्रकार तैर रहे थे, जैसे क्षीरसागर में मुकुन्द और अनन्त।
 
Both the gods were swimming in the waves of Ganga just like Mukunda and Ananta in Kshirsagar.
तात्पर्य
महा समुद्र के दूध की लहरों पर शेष जी नारायण का शैया हैं और इसी प्रकार श्री गौरासुंदर जी की मुकुंद से और नित्यानंद के अनंत से तुलना गंगा के जल में गौरा-नित्यानंद के तैरने के उदाहरण द्वारा दृष्टांत रूप में दर्शाई जाती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)