श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.19.12 
ভক্তি-বল সবে মোর আছযে উপায
ভক্তি বিনা বিশ্বম্ভরে চিনন না যায
भक्ति-बल सबे मोर आछये उपाय
भक्ति विना विश्वम्भरे चिनन ना याय
 
 
अनुवाद
“मेरे पास एकमात्र विकल्प भक्ति सेवा की शक्ति है, क्योंकि भक्ति सेवा के बिना कोई भी विश्वम्भर को नहीं पहचान सकता है।
 
“The only option I have is the power of devotional service, because without devotional service no one can recognize Vishvambhar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)