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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 118
श्लोक
2.19.118
হেন মতে দুই প্রভু আপন আনন্দে
সুখে ভাসিঽ চলিলেন জাহ্নবী-তরঙ্গে
हेन मते दुइ प्रभु आपन आनन्दे
सुखे भासिऽ चलिलेन जाह्नवी-तरङ्गे
अनुवाद
इस प्रकार दोनों भगवान आनंदपूर्वक गंगा की लहरों में तैरने लगे।
Thus both the Gods started swimming happily in the waves of Ganga.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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