श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.19.113 
সবার করিব গৌরসুন্দর উদ্ধার
ব্যতিরিক্ত বৈষ্ণব-নিন্দক দুরাচার
सबार करिब गौरसुन्दर उद्धार
व्यतिरिक्त वैष्णव-निन्दक दुराचार
 
 
अनुवाद
भगवान गौरसुन्दर उन पापी लोगों को छोड़कर सभी का उद्धार करेंगे जो वैष्णवों की निन्दा करते हैं।
 
Lord Gaurasundara will save everyone except those sinful people who slander Vaishnavas.
तात्पर्य
श्री गौरासुंदर की भक्ति भावना की शिक्षाएँ संपूर्ण विश्व का उद्धार करने के लिए है, लेकिन महाप्रभु ने पापी मायावादियों को उद्धार करने की कोई दया नहीं दिखाई जो वैष्णवों की निंदा करते हैं। बल्कि, उन्होंने शराबी और दुष्ट आत्मा की मेजबानी को स्वीकार करने के लिए मनोरंजक कार्यों का मंचन किया। फिर भी, उन्होंने मायावादी वेदांतियों को जो वैष्णवों से ईर्ष्या करते थे, उन्हें अपने दर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)