vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
»
श्लोक 108
श्लोक
2.19.108
সর্ব-বুদ্ধি হরিলেক এক নিন্দা-পাপ
পাছে ও কাহার চিত্তে না জন্মিল তাপ
सर्व-बुद्धि हरिलेक एक निन्दा-पाप
पाछे ओ काहार चित्ते ना जन्मिल ताप
अनुवाद
उनकी सारी बुद्धि केवल ईशनिंदा के पाप में लिप्त होने के कारण ही छीन ली गई थी। फिर भी, उनके चले जाने के बाद भी उन्हें कोई पश्चाताप नहीं हुआ।
All their wisdom was taken away simply because they indulged in the sin of blasphemy. Yet, even after their departure, they showed no remorse.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×