श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  2.19.108 
সর্ব-বুদ্ধি হরিলেক এক নিন্দা-পাপ
পাছে ও কাহার চিত্তে না জন্মিল তাপ
सर्व-बुद्धि हरिलेक एक निन्दा-पाप
पाछे ओ काहार चित्ते ना जन्मिल ताप
 
 
अनुवाद
उनकी सारी बुद्धि केवल ईशनिंदा के पाप में लिप्त होने के कारण ही छीन ली गई थी। फिर भी, उनके चले जाने के बाद भी उन्हें कोई पश्चाताप नहीं हुआ।
 
All their wisdom was taken away simply because they indulged in the sin of blasphemy. Yet, even after their departure, they showed no remorse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)