vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
»
श्लोक 99
श्लोक
2.18.99
হেন রঙ্গ হয চন্দ্রশেখর-মন্দিরে
চতুর্-দিকে হরি-ধ্বনি শুনি উচ্চৈঃস্বরে
हेन रङ्ग हय चन्द्रशेखर-मन्दिरे
चतुर्-दिके हरि-ध्वनि शुनि उच्चैःस्वरे
अनुवाद
चन्द्रशेखर के घर में ऐसी ही आनंदमय लीलाएँ घटित हुईं। हरि के नामों का उच्च स्वर चारों दिशाओं में गूंज उठा।
Similar blissful pastimes took place in Chandrashekhar's home. Loud chants of Hari's name resounded in all directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×