तन मे भवान् खलु वृतः पतिरंगा जायाम्
आत्मार्पितश् च भवतोऽत्र विभो विधेहि
मा वीर-भागमभिमर्शन कैद्य आरद्
गोमायु-वन मृग-पतेर्बलिमम्बुजाक्ष
"इसलिए, हे मेरे प्रिय भगवान, मैंने आपको अपने पति के रूप में चुना है, और मैं आपको अपने आप को समर्पित करती हूँ। कृपया जल्दी से आओ, हे सर्वशक्तिमान, और मुझे अपनी पत्नी बनाओ। हे कमल-आंखों वाले भगवान, शिशुपाल को कभी भी नायक के हिस्से को उस गीदड़ की तरह ना छूने देना जो किसी शेर की संपत्ति चुराता है।"
