श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.18.81 
মোর ধার্ষ্ট্য ক্ষমা কর ত্রিদশের রায
না পারিঽ রাখিতে চিত্ত তোমারে মিশায
मोर धार्ष्ट्य क्षमा कर त्रिदशेर राय
ना पारिऽ राखिते चित्त तोमारे मिशाय
 
 
अनुवाद
हे त्रिदासराय, कृपया मेरे अहंकार को क्षमा करें, क्योंकि मैं अपने हृदय को नियंत्रित करने में असमर्थ हूँ, जो आप में विलीन होना चाहता है।
 
O Tridasaraya, please forgive my ego, as I am unable to control my heart, which wants to merge into You.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)