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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 67
श्लोक
2.18.67
সত্বরে সকল পতি-ব্রতা নারী-গণ
কর্ণ-মূলে ঽকৃষ্ণ কৃষ্ণঽ করে সঙরণ
सत्वरे सकल पति-व्रता नारी-गण
कर्ण-मूले ऽकृष्ण कृष्णऽ करे सङरण
अनुवाद
वहाँ की सतीत्व-सम्पन्न स्त्रियाँ उसके कानों में धीरे-धीरे कृष्ण का नाम जप रही थीं।
The virtuous women there were slowly chanting the name of Krishna in his ears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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