श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.18.66 
আনন্দে পডিলা আই হৈযা মূর্চ্ছিতা
কোথাও নাহিক ধাতু, সবে চমকিতা
आनन्दे पडिला आइ हैया मूर्च्छिता
कोथाओ नाहिक धातु, सबे चमकिता
 
 
अनुवाद
माता शची आनंद के मारे अचेत हो गईं। सभी यह देखकर आश्चर्यचकित थे कि उनके शरीर में जीवन का कोई चिह्न नहीं था।
 
Mother Shachi fainted with joy. Everyone was astonished to see that there was no sign of life in her body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)