श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.18.59 
না পারি রহিতে শূন্য-বৈকুন্ঠ দেখিযা
আইলাম আপন ঠাকুর সঙরিযা
ना पारि रहिते शून्य-वैकुन्ठ देखिया
आइलाम आपन ठाकुर सङरिया
 
 
अनुवाद
“मैं निर्जन वैकुंठ में नहीं रह सकता था, इसलिए भगवान का स्मरण करते हुए मैं यहां आया हूं।
 
“I could not stay in the deserted Vaikuntha, so remembering the Lord, I have come here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)