श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.18.43 
“কৃষ্ণ ভজ, কৃষ্ণ সেব, বল কৃষ্ণ নাম”
দম্ভ করিঽ হরিদাস করযে আহ্বান
“कृष्ण भज, कृष्ण सेव, बल कृष्ण नाम”
दम्भ करिऽ हरिदास करये आह्वान
 
 
अनुवाद
हरिदास ने गर्व से सभी को आमंत्रित किया, “कृष्ण की पूजा करो, कृष्ण की सेवा करो, कृष्ण के नामों का जप करो!”
 
Haridasa proudly invited everyone, “Worship Krishna, serve Krishna, chant the names of Krishna!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)