श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.18.42 
হাতে নডি চারি-দিকে ধাইযা বেডায
সর্বাঙ্গে পুলক ঽকৃষ্ণঽ সবারে জাগায
हाते नडि चारि-दिके धाइया वेडाय
सर्वाङ्गे पुलक ऽकृष्णऽ सबारे जागाय
 
 
अनुवाद
जब वह हाथ में छड़ी लेकर सबको सचेत करते हुए दौड़ रहा था, तो कृष्ण के प्रेम से उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए।
 
As he ran with a stick in his hand, warning everyone, his body was covered with goosebumps due to his love for Krishna.
तात्पर्य
नाड़ी शब्द बांस के डंडे, लाठी या छड़ी को दर्शाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)