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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य
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श्लोक 36
श्लोक
2.18.36
সর্ব-ভাবে নাচে মহা-বিদূষক-প্রায
আনন্দ-সাগর-মাঝে ভাসিযা বেডায
सर्व-भावे नाचे महा-विदूषक-प्राय
आनन्द-सागर-माझे भासिया वेडाय
अनुवाद
वह एक कुशल विदूषक की तरह विभिन्न भावों में नृत्य करता रहा और आनंद के सागर में तैरता रहा।
Like a skilled clown, he kept dancing in different expressions and floating in the ocean of joy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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