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श्लोक 2.18.33  |
কর-যোডে অদ্বৈত বলিলা বার-বার
“মোরে আজ্ঞা প্রভু কোন্ কাচ কাচিবার?” |
कर-योडे अद्वैत बलिला बार-बार
“मोरे आज्ञा प्रभु कोन् काच काचिबार?” |
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| अनुवाद |
| अद्वैत ने हाथ जोड़कर बार-बार पूछा, "हे प्रभु, मुझे बताइये कि मैं कौन-सा वस्त्र पहनूं?" |
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| Advaita folded his hands and asked again and again, "O Lord, please tell me what clothes should I wear?" |
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