श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  2.18.228 
যতেক আইসে লোক আচার্যের ঘরে
চক্ষু মেলিবারে শক্তি কেহ নাহি ধরে
यतेक आइसे लोक आचार्येर घरे
चक्षु मेलिबारे शक्ति केह नाहि धरे
 
 
अनुवाद
जो लोग आचार्यरत्न के घर आये, वे अपनी आँखें खोलने में असमर्थ थे।
 
Those who came to Acharyaratna's house were unable to open their eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)