श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 227
 
 
श्लोक  2.18.227 
চন্দ্র, সূর্য, বিদ্যুত্ একত্র যেন জ্বলে
দেখযে সুকৃতি-সব মহা-কুতূহলে
चन्द्र, सूर्य, विद्युत् एकत्र येन ज्वले
देखये सुकृति-सब महा-कुतूहले
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता था मानो चाँद, सूरज और बिजली एक साथ घर को रोशन कर रहे हों। सौभाग्यशाली व्यक्ति यह देखकर बहुत प्रसन्न होते थे।
 
It seemed as if the moon, sun, and lightning were all illuminating the house at once. Those fortunate enough to witness this were delighted.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)