श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  2.18.225 
নাচিল জননী-ভাবে ভক্তি শিখাই
যাসবার পূরিল আশা স্তন পিযাইযা
नाचिल जननी-भावे भक्ति शिखाइ
यासबार पूरिल आशा स्तन पियाइया
 
 
अनुवाद
भगवान ने माता के रूप में नृत्य किया और भक्ति की शिक्षा दी। फिर उन्होंने सभी को स्तनपान कराकर उनकी मनोकामनाएँ पूरी कीं।
 
The Lord danced in the form of a mother and taught devotion. Then, by breastfeeding, she fulfilled everyone's wishes.
तात्पर्य
अपनी आध्यात्मिक और भौतिक ऊर्जा की गतिविधियों को प्रदर्शित करते हुए प्रभु ने भक्ति सेवा की शिक्षा दी, जो कि बद्ध आत्माओं में निष्क्रिय रहने वाली शाश्वत प्रवृत्ति है। उन्होंने आत्म-साक्षात्कार प्राप्त आत्माओं को इस भौतिक संसार में आवश्यक खाद्य पदार्थों के वितरण के सिद्धांतों और स्वयं से सेवा लेने के बजाय परम प्रभु को सेवा अर्पित करने की शिक्षा दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)