श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  2.18.223 
এত পরিহারে ও যে পাপী নিন্দা করে
তবে লাথি মারোঙ্ তার শিরের উপরে
एत परिहारे ओ ये पापी निन्दा करे
तबे लाथि मारोङ् तार शिरेर उपरे
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं उस पापी व्यक्ति के सिर पर लात मारता हूँ जो भगवान नित्यानंद की महिमा की अवहेलना करता है और उनकी आलोचना करने का साहस करता है।
 
Therefore I kick the head of that sinful person who disregards the glories of Lord Nityananda and dares to criticize Him.
तात्पर्य
जो अपने पिछले पापों के कारण पापमयी चित्त वाले हैं, वे श्री नित्यानंद-बलदेव या उनकी दिव्य लीलाओं के बारे में सच्चाई को नहीं समझ सकते हैं, और इस प्रकार वे उनकी ईशनिंदा करते हैं। लेखक के द्वारा उनके सिरों पर लात मारने के विषयों का उल्लेख किया गया है ताकि यह प्रकट किया जा सके कि ऐसे घृणित पापी व्यक्तियों की अवधारणाएँ अत्यंत घृणित और अवमाननीय हैं। एक वैष्णव से इस प्रकार की सजा प्राप्त करने से, जो लोग हरि की सेवा के विरोधी हैं, उनके भाग्य का जागरण होता है, लेकिन सामान्य मूर्ख लोग इसे नहीं समझ सकते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)