श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  2.18.220 
কৃষ্ণ-অনুগ্রহ যারে, সে এ মর্ম জানে
অল্প-ভাগ্যে নিত্যানন্দ-স্বরূপ না চিনে
कृष्ण-अनुग्रह यारे, से ए मर्म जाने
अल्प-भाग्ये नित्यानन्द-स्वरूप ना चिने
 
 
अनुवाद
केवल कृष्ण की कृपा प्राप्त व्यक्ति ही इसे सत्य रूप से समझ सकता है। अल्पभाग्यवान व्यक्ति नित्यानंद को नहीं पहचान सकते।
 
Only one blessed by Krishna can truly understand this. Those less fortunate cannot recognize Nityananda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)