श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 218
 
 
श्लोक  2.18.218 
যখন যে-রূপে গৌরচন্দ্র যে বিহরে
সেই অনুরূপ রূপ নিত্যানন্দ ধরে
यखन ये-रूपे गौरचन्द्र ये विहरे
सेइ अनुरूप रूप नित्यानन्द धरे
 
 
अनुवाद
जब भी गौरचन्द्र किसी विशेष रूप में लीला का आनंद लेते हैं, तो नित्यानंद उन लीलाओं के लिए उपयुक्त रूप धारण कर लेते हैं।
 
Whenever Gaurachandra enjoys pastimes in a particular form, Nityananda assumes the appropriate form for those pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)