श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 213
 
 
श्लोक  2.18.213 
ইচ্ছা-ময মহেশ্বর ইচ্ছা-কাচ কাচে
তান ইচ্ছা নাহি করে, হেন কোন্ আছে?
इच्छा-मय महेश्वर इच्छा-काच काचे
तान इच्छा नाहि करे, हेन कोन् आछे?
 
 
अनुवाद
वे प्रभुओं के प्रभु हैं और परम स्वतंत्र हैं। वे जिस रूप में चाहें प्रकट हो जाते हैं। कौन है जो उनकी आज्ञा का उल्लंघन करेगा?
 
He is the Lord of lords and is supremely free. He appears in any form He wishes. Who would disobey His command?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)