श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 210
 
 
श्लोक  2.18.210 
মহারাজ-রাজেশ্বর প্রভু বিশ্বম্ভর
এই রঙ্গ করিলেন নদীযা-ভিতর
महाराज-राजेश्वर प्रभु विश्वम्भर
एइ रङ्ग करिलेन नदीया-भितर
 
 
अनुवाद
राजाओं के राजा भगवान विश्वम्भर ने नादिया में ऐसी लीलाएं की थीं।
 
Lord Visvambhara, the king of kings, performed such pastimes in Nadia.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)