श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  2.18.208 
স্তন-পানে সবার বিরহ গেল দূর
প্রেম-রসে সবে মত্ত হৈলা প্রচুর
स्तन-पाने सबार विरह गेल दूर
प्रेम-रसे सबे मत्त हैला प्रचुर
 
 
अनुवाद
भगवान का स्तन दूध पीकर उनकी विरह भावनाएँ कम हो गईं और वे परमानंद प्रेम की मधुरता में उन्मत्त हो गए।
 
After drinking the Lord's breast milk, his feelings of separation subsided and he became intoxicated with the sweetness of ecstatic love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)