श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  2.18.200 
কেহ বলে,—“আরে রাত্রি কেনে পোহাইলে?
হেন রসে কেন কৃষ্ণ বঞ্চিত করিলে?”
केह बले,—“आरे रात्रि केने पोहाइले?
हेन रसे केन कृष्ण वञ्चित करिले?”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, "हे रात्रि, तुम क्यों समाप्त हो गई हो? हे कृष्ण, तुमने हमें ऐसे सुख से क्यों वंचित कर दिया?"
 
Someone said, "O night, why have you ended? O Krishna, why have you deprived us of such happiness?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)