श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.18.20 
লক্ষ্মী-বেশে অঙ্ক-নৃত্য করিব ঠাকুর
সকল বৈষ্ণব-রঙ্গ বাডিল প্রচুর
लक्ष्मी-वेशे अङ्क-नृत्य करिब ठाकुर
सकल वैष्णव-रङ्ग बाडिल प्रचुर
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि भगवान लक्ष्मी के वेश में नृत्य करेंगे, सभी वैष्णवों को बहुत खुशी हुई।
 
Knowing that the Lord would dance in the guise of Lakshmi, all the Vaishnavas were very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)