श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 18: महाप्रभु के गोपी के रूप में नृत्य  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.18.198 
চৌদিকে উঠিল বিষ্ণু-ভক্তির ক্রন্দন
প্রেম-ময হৈল চন্দ্রশেখর-ভবন
चौदिके उठिल विष्णु-भक्तिर क्रन्दन
प्रेम-मय हैल चन्द्रशेखर-भवन
 
 
अनुवाद
चारों दिशाओं में भगवान विष्णु की भक्ति में रोने की ध्वनि गूंज उठी। चन्द्रशेखर का घर प्रेम के उल्लास से भर गया।
 
The sound of wailing in devotion to Lord Vishnu echoed in all directions. Chandrashekhar's home was filled with the joy of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)